दिल्ली - मुम्बई औद्योगिक गलियारा (DMIC)

दिल्ली - मुम्बई औद्योगिक गलियारा (DMIC)

दिल्ली- मुम्बई औद्योगिक गलियारा प्रोजेक्ट भारत की सबसे बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं मे से एक है। इस कॉरिडोर को बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश ओर व्यापार को बढ़ाना है। इसके पहले फेस पर तकरीबन 100 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान लगायाजा रहा है, जिसके लिए सरकार डीएफसी यानी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडारे का निर्माण कर रही है। यह एक 1483 किलोमीटर लम्बा कॉरिडोर देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली को देश की औद्यिगिक राजधानी मुम्बई से जोड़ेगी, जिसमें मल्टी मॉडल हाई एक्सज लोड डेडिकिटेड फ्रेट कॉरिडोर व निर्माण किया जायेगा। यह कॉरिडोर देश के छह राज्य से होकर गुजरेगा, कॉरिडोर का 77 प्रतिशत हिस्सा गुजरात (38प्रतिशत) और राजस्थान(39 प्रतिशत) से होकर गुजरेगा जबाकि महाराष्ट्र और हरियाणा से 10 प्रतिशत, जबकि उत्तर प्रदेश और दिल्ली का 1.5 प्रतिशत-1.5 प्रतिशत योगदान इस पूरे प्रोजेक्ट में होगा।

 

डीएमआईडिसी के एमडी और चैयरमैन श्री अमिताभ कांत ने कहा कि "हम सिर्फ कॉरिडोर नहीं बना रहे है, बल्कि हम 7 नए शहर बना रहे हैं।दिल्ली से लेकर मुम्बई तक एक इण्डस्ट्रीयल लेन होगी, जो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए जुड़ी होगी। लेकिन हम इसके आसापास 7 नए इण्डस्ट्रीयल शहर विकासित कर रहे हैं।

1. भाड़ा एकीकरण केन्द्र गोदाम तक ताकि नजदीक में उत्पन्न आतारिक व बाहरी भाड़ा को निपटाया जा सके।

2. ट्रक तथा माल गाड़ी का सामान चढ़ाने व उतारते के लिए दुलाई की सुविधा।

3. एक क्षेत्र में उत्पादित माल को रखने, दिखाने व थोक बिक्री के लिए एक व्यवसाय केन्द्र।

4. सहायक सेवाएँ जैसे कि कस्टम से जुड़ा हुआ गोदाम, कोल्ड स्येरेज आदि।

5. मूल्य वर्धक सेवाएँ जैसे की की सुचना प्रौधीमिकी, ट्रैकिंग, इन्वेटरी कण्ट्रोल, माल चढ़ाने व पैकिंग के लिए इंजीनयरिंग, स्वाचालन सुविधाएँ,लेबल करने व पैक करने की सुविधाएँ, निरीक्षण व क्वालिटी कण्ट्रोल, माल चक्रीय तथा उपकरण की मरम्मत व रख-रखाव की सुविधा।